बुधवार, फ़रवरी 15, 2017

मुख्य मंत्री का मुख

तामिलनाडू एक ऐसा राज्य है, जहाँ चुनाव नहीं हुए मगर मुख्यमंत्री स्वर्गवासी हो गईं इस हेतु मुख्यमंत्री पद संकट काल से गुजर रहा है.. राज्यपाल लाइम लाईट में हैं..सब दावेदार उनसे मिल जुल रहे हैं और वो अपना फैसला सुरक्षित रखे हैं. ऐसे कम ही मौके होते है जब लोग राज्यपाल निवास की तरफ टकटकी लगायें बैठे हों अतः जितना खींच सके की तर्ज पर खीचन का माहौल बना हुआ है.
टकटकी लगाये बैठी मुख्यमंत्री की मुख्य दावेदार एकाएक यात्रा पर निकल गईं जेल की...वो भी चार साल के लिए और उनकी दावेदारी अब दस वर्षों के लिए स्थगित रहेगी न्यायालीन फैसले के चलते. मगर दस साल का क्या है? सत्ता की चाह ऐसी शै है कि दशक मिनटों में गुजर जाते हैं? और उम्र भी कोई खास नहीं..६१ बरस..राजनीति में तो यह उम्र अभी सीख रहा हूँ...मेरा साथ दीजिये भाईयों बहनों वाली होती है...जब यात्रा से वापस आकर सन्यास पूर्ण करेंगी, ७१ वर्षीय युवा नेत्री के हाथ फिर प्रदेश की कमान होगी. ये मैं नहीं कह रहा...मेरी राजनीतिक विषयों पर विशेषज्ञ कलम कह रही है...हम तो बस निमित्त मात्र हैं...
अम्मा का स्वर्गवास विचलित करने वाला निकला...खास कर उत्तर भारतियों के लिए...उनके आशीर्वाद प्राप्त नव मुख्यमंत्री के नाम का उच्चारण करना अभी सीख ही रहे थे कि शशीकला के जेल जाने से उछले एक नये नाम को सीखने की जुगत में लगे हैं. अब दर रोज नये नये नाम बोलना सीखें कि उत्तर भारत में हो रहे चुनाव की सोचें.
सोचने की बात से एक सोच उभरी कि मृत्यु से बड़ा पाप विनाशक कोई भी नहीं. गंगा में नहा कर भी पापी पापॊ कहला सकता है मगर जीते जी भले ही जनता यान्यायालय आदि आपको पापी, दुष्ट, अपराधी घोषित कर दें किन्तु मृत्यु के भुजपाश में जाते ही आप स्वर्गवासी हो जाते हैं. आज तक नरकवासी होते किसी को नहीं सुना...एकदम खाली खाली सी..सूनसान जगह होगी..
दक्षिण से दिमाग हटे तो चार और राज्य ऐसे हैं जहाँ माहौल गरम है. मगर वहाँ मुख्यमंत्री पद का सवाल अभी उलझा नहीं है अतः राज्यपाल अभी लाइम लाईट में नहीं हैं.
अधिकतर जनता वोट डाल चुकी है या डाल रही है...जाने कौन सत्तासीन होगा और जाने कौन मुख्य मंत्री मगर नूरा कुश्ति के नतीजे के लिए इन्तजार लगा है और अनुमानों का बाजार गर्म है.
अनुमान का क्या है वो तो हम भारतवासियों का शगल है..और अनुमान भी ताल ठोक कर लगाते हैं कि बॉस, गलत निकल जाये तो आधी मूँछ मुड़ा कर शहर घूमा देना.
पनवाड़ी की दुकान पर चर्चा चल रही है कि हमसे पूछो हम बताते हैं..नोट करो.. पंजाब में झाडू आ रही है...गोवा में झाडू आई ही समझो ..थोड़ा ऊँच नीच हुई तो कांग्रेस है ही...बाहर से टेका लगा देगी तो भी चल जायेगा....उत्तराखण्ड तो सब जानते ही हैं कि क्या होना है..(ये स्टेटमेन्ट इसलिए कि कोई नहीं जानता है) ..और फिर यूपी..उसके लिए क्या कहें...
अब बताओ..इसमें पंजाब छोड़ क्या नोट करें?
चैलेन्जर सामने से बोल रहा है कि ये जो यूपी में कमल है भैय्या...कीचड़ मे खिलता है..सोच लेव!! साईकिल से जाकर हाथ से तोड़ोगे तो साईकिल भी और पंजा भी, दोनों कीचड़ में सन जायेगा...खुद से टूटा तो वहीं कीचड़ में गिर कर रह जायेगा...एक्के तरीका है कि हाथी जाये..और अपनी सूँड़ से तोड़कर लाये तो ही सुरक्षित आ सकता है...हाथी का कीचड़ में सना पाँव तो यूँ भी वेदों में पवित्र और दिव्य माना गया है...
चैलेन्जर ने दर्शन शास्त्र की बुद्धिजीवी टाईप बात कर दी है...पान की दुकान से भीड़ छट चुकी है...
सड़क पर हर तरफ पान की पीक के निशान नजर आ रहे हैं...

-समीर लाल ’समीर’
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मंगलवार, फ़रवरी 14, 2017

पुतनी वोट डालने नहीं जायेगी, बस्स!!

पिछले साल वेलेन्टाईन डे पर सब को कुछ न कुछ अपनी बीबी, प्रेमिका के लिए खरीदता और खिलाता देख कर मुन्ना ने यह तय किया था कि चलो, इस बार तो अम्मा की तबीयत पर खर्चा लगा है मगर अगली बार तुमको पक्का वो गुलाबी वाला मंहगा सलवार सूट दिलवायेंगे. अम्मा भी चला चली की बेला में हैं तब तक न रुक पायेंगी तो तुम पर कोई रोक टोक भी न होगी. एक चश्मा भी खरीद देंगे. खूब सलवार सूट पहन कर और चश्मा लगा कर सेल्फी खींचना.पुतनी भी मुन्ना की बात सुन कर बहुत खुश हो गई थी.
अम्मा स्वास्थय में ऊँच नीच लगाये छः माह पूर्व समय रहते निकल गई. कुछ दिन कमी खली मगर जीना तो है ही यही सोच कर पुतनी वेलेन्टाईन डे का इन्तजार करने लगी. अक्सर सोचती तो चेहरे पर गुलाबी रंग उतर आता. उसके गांव में तो ऐसे त्यौहार का पता भी नहीं था शादी से पहले उसे. शहर का यही तो अन्तर होता.
मगर होनी को कौन टाल सकता है? इस बार मुन्ना की ऐन वेलेन्टाईन डे से पहले चुनाव की ड्यूटी लग गई. मुन्ना बोल कर गया है कि कोई बात नहीं, अगले साल दिला देंगे और साथ में वो घूमने वाले रेस्टॉरेन्ट में खाना भी खिलवायेंगे. बिना मौके के ये सब भला कब होता है एक आम निम्न वर्गीय परिवार में.
पुतनी उदास भी है और सरकार से गुस्सा भी कि ये भी कोई समय है क्या चुनाव कराने का?
पुतनी इस बार गुस्से में वोट डालने नहीं जायेगी, बस्स!!
किसी को अच्छा लगे या बुरा...किसी ने उसके अच्छा बुरा लगने की भी कहाँ सोची भला?

-समीर लाल ’समीर’
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रविवार, फ़रवरी 12, 2017

रिंग टोन: खोलती है राज आपके व्यक्तित्व का

कनाडा से इतर भारत में हर दूसरा मोबाईल फोन, रिंग टोन में गाना बजाता और सुनाता है. अब की भारत यात्रा में तरह तरह की रिंग टोन सुनते और उससे जुड़े फोनधारक के व्यक्तित्व का अध्ययन करते जो परिणाम आये, वह जनहित में प्रकाशित कर रहा हूँ..पुनः आप जैसे अपवादों को छोड़ कर: 
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे..
रिंग टोन रखने वाले लोग ऐसे लगे जैसे हजार पाप कर के गंगा जी में में डुबकी लगा कर समस्त पापों से मुक्ति पा लेने का आभास पाले पुनः नये पाप करने निकल पड़े हों...हर आने वाले फोन पर पिछले फोन काल पर किये पापो से मुक्ति और नये पाप करने का मार्ग सुद्दण होता नजर आता है इन्हें...
मेरे महबूब कयामत होगी...आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी...
ये वो फ्रस्टेटेड बन्दे हैं जिन्हें इस बात पर कोई भरोसा ही नहीं कि उनकी मोहब्बत भी कभी कामयाब हो सकती है...उन्होंने वैसे भी अपनी मोहब्बत कभी कामयाब होने की तमन्ना से की भी नहीं...मानो और कुछ न सुझा और पिता जी लतिया रहे हों तो एल एल बी कर ली...फिर कहते फिर रहे हों कि वकालत दिमाग नहीं दलाली का काम है और वो हम से न हो पायेगा...अपना इन्फिरियारीटी काम्पलेक्स छिपायें भी तो भला कैसे?
बहारों फूल बरसाओ, मेरा महबूब आया है...
ये हर वक्त आलस्य की रजाई ओढ़े वो अलाल लोग हैं जो अपना काम दूसरों पर टाल में माहिर होते हैं. खुद कुछ करना नहीं...अरे प्रभु, महबूब तुम्हारा आ रहा है तो फूल भी तुम ही बरसाओ, बहारों को क्यूँ घसीटते हो..उनका काम फूल खिलाना और उसकी महक फैलाना है और तुम हो कि अपना काम उन पर डाले दे रहे हो..
सुन रहा है न तू, रो रहा हूँ मैं..
ये महाराज अपनी प्रेमिका और पत्नी से झूठ बोलने में महारत हासिल कर चुके हैं...रो वो कुछ नहीं रहे हैं..दोस्तों के साथ ही बैठे बीयर पी रहे हैं और जैसे ही रिंग टोन बजी...बस...मानो कि किसी गायक को हारमोनियम पर किसी ने स्केल दे दिया हो..साआआ...और फिर उसी स्केल पर इनका गीत शुरु...जानूं, सुन रही हो न...आई एम मिसिंग यू सो मच...और यह बोलते हुए भी..पठ्ठा दोस्तों आँख मार कर बता रहा है कि उसका फोन है...
सीटी बजने की आवाज...
सारी जिन्दगी सीटी बजाकर किसी को पलटवाने की ख्वाहिश पाले वो भयभीत इन्सान जिसे आजतक ठीक से सीटी बजाना भी नहीं आ पाया कभी..बस...इसे ऐसा समझे कि हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले...दम तो खैर क्या निकलता...हर काल पर अब सीटी जरुर निकल जा रही है...
पुराने जमाने वाले फोन की घंटी...ट्रिन ट्रिन...
काश!! कि वो दिन लौट आयें..हमारा जमाना ही कुछ और था..का नारा बुलंद करने वाले और.नये जमाने से साथ कदम ताल न मिला सकने की वजह से पुराने जमाने के पल्लु में मूँह छिपाये उसी फोन की ट्रिंन ट्रिन सुन रहे हैं..इनके पास उस जमाने के किस्सों के सिवाय कुछ भी नहीं.
वाइब्रेशन मोड में हूम्म्म्म्म्म, हूम्म्म्म की आवाज करता फोन...
न छिपा पाये..न बता पाये...बस यूँ ही हूम्म्म हूम्म में जिन्दगी बिता आये,..अरे, इत्ता तो सोचो..कि उपर जाकर क्या जबाब दोगे...न घंटी बजी और न ही चुप रहे......ये बड़े खतरनाक टाईप के लोग होते हैं मानो कि कोई निर्दलीय उम्मीदवार..क्या पता कब सरकार का समर्थन कर दे...या कब विरोधियों के खेमे में जाकर सरकार गिरा दे....
साईलेंट मोड पर रखा हुआ फोन..
अपने हक की भी तिलांजलि दिये हर हाल में कम्प्रोमाईज़ किये ...बेवजह खुद को खुश दिखाने वाले...और अन्दर से इतना मायूस कि कहीं कोई उनकी खुशी देख कर नाराज न हो जाये...इस हेतु आने वाले फोन को झुठलाते लोग...जो बाद में उन्हीं मिस हुये कॉलों को फोन करके माफी मांगेगे कि भाई, कहीं व्यस्त था जरा!! सॉरी..
अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में..
ये रिंग टोन इस यात्रा के दौरान जब अपनी पत्नी के फोन से सुनी तो लगा कि शायद, भारत घुमाने लायें हैं इस हेतु अनुग्रहित टाईप हुई लगा ली होगी रिंग टोन...मगर असल मायने कनाडा लौट कर समझ आया...जब सारा सौंपा हुआ भार क्रेडिट कार्ड के बिल रुप में सामने आया ..उस खरीददारी का जो इनने भारत में की थी...अब जो भार हमारे हाथों में सौंपा है सो तो उतारना ही है...

खैर...और अनेकों रिंग टोन सुनाई पड़ी...जैसे बेबी डॉल मैं सोने की...उनका व्यक्तित्व आप आंकिये ...

-समीर लाल ’समीर’

-Published in subahasavere Bhopal me 11 Feb, 2017 
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शनिवार, फ़रवरी 11, 2017

कैसा तेरा प्यार- कैसा गुस्सा है तेरा


सुबह जब मैं उनके घर के सामने से निकला तो भैय्या जी दण्ड बैठक लगा रहे थे..११०, १११ उनके बाजू में खड़ा उनका चेला दण्ड की गिनती गिन रहा था. सामने दालान में ही एक चूल्हे पर मावा मिला दूध औंटाया जा रहा था. आजकल रोज सुबह हजार दण्ड लगाने के बाद भैय्या जी की सरसों के तेल से मालिश होती है. फिर कुनकुने पानी से स्नान कर औंटाया हुअ दूध ग्रहण करते हैं और इस तरह उनके दिन की शुरुआत होती है.
फिर चेलों की आवाजाही शुरु हो जाती है. योजनायें बनती हैं. चेले लठ्ठ को तेल पिला रहे होते हैं और भैय्या जी कान खोदते, बतियाते पान चबा रहे होते हैं.
पूछने पर पता चला कि त्यौहार की तैयारी चल रही है. आश्चर्यजनक तौर पर कोई त्यौहार तो आस पास आता दिखता न था. नागपंचमी भी आने में तो पूरा आधा साल बाकी है कि उस वजह से पहलवानी की तैयारी कर रहे हों.
हाँ, चुनावी माहौल जरुर है चारों ओर और उसके लिए इस तरह की तैयारी भी मुफ़ीद है.  मगर भैय्या जी ने चुनाव को कभी त्यौहार का दर्जा नहीं दिया. वो उनकी जीवन शैली है, उनकी धड़कन है ओर उनके जीवन यापन का साधन है. चुनाव हैं तो बाकी सब त्यौहार हैं वरना तो यह जीवन ही बेकार है कि तर्ज पर जीने वाले भैय्या जी, राजनिती के बाहुबलियों की बस्ती के सरगना हैं, जिन पर अनेकों हत्याओं और बलात्कार के मामले दर्ज हैं.  उनके लिए चुनाव उनका एक ऐसा दायित्व है जिसे निभाने के लिए वह इस मृत्युलोक में पधारे हैं और इसी दायित्व के चलते कितने लोगों को मृत्यु के घाट तक पहुँचा आये हैं, वो भला चुनाव को त्यौहार मानें, न!! ऐसा हो ही नहीं सकता.
अतः मन की शांति के लिए पूछना ही पड़ा कि भैय्या जी किस त्यौहार की तैयारी में जुटे हैं?
पता चला कि वेलेन्टाईन डे की तैयारी कर रहे हैं. दो दिन बचे हैं बस!! एकदम युद्ध स्तर पर तैयारियाँ चल रही हैं.
हमारे तो पाँव तले धरती ही खिसक गई. अगर मोहब्बत की उम्र की एक्सपायरी का आधार नेताओं की मोहब्बत की कहानियों से भी उठाये तो भी ६० बसंत से उपर तो क्या तय कर पायेंगे कुछ अपवादों को छोड़ कर. इस आधार पर भी मोहब्बत की एक्सपायरी डेट पार किये भैय्या जी को लगभग आधा दशक से उपर बीत चुका है.
ऐसी उम्र में वेलेन्टाईन डे? क्या मूँह दिखायेंगे घर परिवार में ये? हालांकि राजनेताओं को इन सब बातों की चिन्ता तो होती नहीं है, यह सब तो आप हम जैसे आमजनों के लिए बनाई गई सामाजिक बाध्यतायें हैं.
फिर भी भैय्या जी इतने उत्साह्पूर्वक वेलेन्टाईन डे का त्यौहार मनाने की तैयारी करें, वो भी ऐसे कि जब नव युवा प्रेमी नये कपड़े बनवा रहे हैं, गिफ्ट खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, गुलाब के बुके पसंद कर रहे हैं, तब भैय्या जी दण्ड लगाकर और मालिश करा कर बदन बना रहे हैं, दूध औंटा कर मावे डाल कर पी रहे हैं, फूल की जगह लठ्ठ सजा रहे हैं तेल पिलवा कर...अजब तरीका है भैय्या जी का. बाहुबलियों की बात यूँ भी निराली होती है. यह तो खुश हों तो बंदुक दागें, गुस्सा हों तो बंदुक दागें...शायद इन्हीं की प्रेमिकायें गाती होंगी... कैसा तेरा प्यार कैसा गुस्सा है तेरा, तौबा सनम तौबा सनम…
वेलेंटाईन डॆ के दिन हम भैय्या जी के घर के सामने पेड़ के नीचे खड़े हो गये यह देखने के लिए कि क्या नजारा बनेगा इनके इस उम्र में वेलेन्टाईन डे मनाने के जोश का…
कुछ ही देर में भैय्या जी अपने सैकड़ों चेलों के साथ लट्ठ लिये निकलते दिखाई दिये…जय श्री राम का नारा आकाश में गुंजायमान हो गया..
शाम को टीवी में शहर भर के हजारों प्रेमी प्रेमिकाओं के पीटे जाने की खबर ब्रेकिंग न्यूज बनीं और भैय्या जी अपने साथियों के साथ प्रेस कांफ्रेस करते नजर आये…हम अपनी संस्कृति से खिलवाड़ नहीं होने देंगे.
-समीर लाल ’समीर’
#jugalbandi #जुगलबन्दी


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